दुनिया के कई
देशों के पास ऐसे खतरनाक हथियार हैं, जो पल भर में दुश्मन का सफाया कर सकते हैं. लेकिन सामूहिक विकास के हथियारों
को सिर्फ एक बार इस्तेमाल किया जाता सकता है जबकि लड़ाकू विमान एक ऐसी चीज है जिसे
दुश्मन को डराने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा अगर वाकई में
युद्ध छिड़ जाये तो जीत उस देश के कदम चूमेगी जिसके पास सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान
हैं.
ये भी पढ़ें- दुनिया के 10 सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम कौन से हैं। 10 largest cricket stadium
इसी कारण अब
विश्व में हर देश खतरनाक से खतरनाक लड़ाकू विमान रखना चाहता है. किसी भी लड़ाकू
विमान को उसकी दो विशेषताएं खतरनाक बनातीं हैं; पहला विमान की स्पीड दूसरी उसकी स्टील्थ पॉवर अर्थात रडार से छुपने की छमता.
![]() |
| Most-dangerous-fighter-aircraft-in-the-world-like-Rafael-in-hindi |
इस लेख में हम
आपको राफेल जैसे 6 अन्य ताकतवर
लड़ाकू विमानों के बारे में बता रहे हैं.
1. F-22 रैप्टर (LockheedMartin F-22 Raptor-USA)
अमेरिका द्वारा
बनाया गया यह लड़ाकू विमान आज की दुनिया में पांचवीं पीढ़ी का सबसे खतरनाक विमान
माना जाता है. यह एक तरीके से हवा में उडने वाले अदृश्य रडारों में एक है. एफ 22 का रडार अद्वितीय है क्योंकि यह अन्य
एयरक्राफ्ट को इस विमान का लोकेशन पता नहीं करने देता है. इसमें ग्राउंड अटैक,
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, और सिग्नल इंटेलिजेंस ट्रैकर जैसी विशेषताएं हैं.
![]() |
F-22 रैप्टर (Lockheed Martin F-22 Raptor-USA |
इस एक विमान की
अनुमानित लागत 150 मिलियन डॉलर के
लगभग आती है. यह विमान 2005 में बनकर तैयार
हो गया थे लेकिन अमेरिकी वायुसेना को इसकी डिलीवरी 2012 में हुई थी. इस समय अमेरिका के पास इसकी लगभग 195 यूनिट्स हैं. स्पीड के मामले में भी यह सब
विमानों का चाचा है इसकी अनुमानित स्पीड 2,410 km/h है.
2. चीन का चेंगदूजे-20 (Chengdu J-20 (Black Eagle)-China)
यह एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जो किसी भी मौसम में कहर बरपा सकता है. यह वजन में हल्का
है. पीपल लिब्रेशन आर्मी एयर फोर्स के लिए इसे पीपल रिपब्लिक ऑफ़ चाइना चेंगदूएयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (सीएसी) ने तैयार किया है.
![]() |
चीन का चेंगदूजे-20 (Chengdu J-20 (Black Eagle)-China) |
3. सुखोई Su-57(T-50):
इसका निर्माण भारत और रूस
के प्रयास से रुसी और भारतीय सेनाओं के लिए किया जा रहा है. यह एक श्रेष्ठ,
सिंगल सीट, दो इंजन जेट के लिए डिजाइन किया गया मल्टीरोल लड़ाकू विमान
है. सुखोई का आंतरिक नाम टी-50 है.
![]() |
3. सुखोई Su-57(T-50): |
इसकी अधिकतम
गति 2,140 किमी/घंटा है और एक
विमान की लागत 40-45 मिलियन अमेरिकी
डॉलर के बीच आती है. यह विमान दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ तकनीकी वाले विमानों
में से एक है और मिग -29 और Su-27 का उत्तराधिकारी है.
4. लॉकहीड मार्टिनएफ -35 लाइटनिंग II-USA (Lockheed Martin F-35 Lightning II – USA ):
लॉकहीड मार्टिन एफ -35 लाइटनिंग II संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा विकसित एक पांचवां पीढ़ी का लड़ाकू विमान है.
इसके विकास के प्रयास 2006 से ही हो रहे
हैं और अभी तक केवल 13 यूनिट्स ही
बनायीं जा सकी हैं. अभी तक यह विमान विकास के चरण में ही है. इसे सुपर-एडवांस्ड
कंप्यूटरों की मदद से ऑपरेट किया जायेगा. यह विमान भी राडार को चकमा देने में
सक्षम है.
![]() |
Lockheed Martin F-35 Lightning II – USA ): |
लॉकहीड मार्टिन
एफ -35 लाइटनिंग II जमीन पर हमला, जासूसी सैनिक परीक्षण और वायु रक्षा मिशन ऑपरेट करने में
सक्षम है. इसके तीन अलग-अलग मॉडल्स बनाये जा रहे हैं. ये हैं; F-35A, F-35B
और F-35C. इसमें F-35A की अनुमानित लागत
$89.2 मिलियन, F-35B की अनुमानित लागत $115.5 मिलियन और F-35C की अनुमानित लागत $107.7 मिलियन है. इसकी
स्पीड 1,930 km/h है जो कि ध्वनि
की चाल से 1.6 गुना अधिक है.
5. मित्सुबिशी एक्स-2 शीनशीन (जापान) Mitsubishi ATD-X(Shinshin)-Japan: जापान;
X-2Shinshin के नाम पर अपना पांचवी
पीढ़ी का पहला लड़ाकू विमान तैयार कर रहा है. इसका पूर्व नाम "ATD-XShinshin" था. दो इंजनों वाला यह
विमान स्टील्थ तकनीकी से लेस होगा और इसे एक ही पायलट द्वारा उड़ाया जायेगा. इसकी
अधिकतम स्पीड 2,570 km/h होगी. यह 50,000 फीट की ऊँचाई तक उडान भरने से सक्षम होगा.
![]() |
Mitsubishi ATD-X(Shinshin)-Japan |
6. यूरोफाइटर टाइफून(Eurofighter Typhoon):
यूरोफाइटर टाइफूनयूरोप की सबसे एडवासं टेक्नोंलॉजी की पेशकश है. इसमें मिसाइल भंडारण की क्षमता
है. इस विमान को लेकर दावा किया जा चुका है कि यह अमेरिका के F-22 Raptor का सामना आसानी से कर सकता है. यह लड़ाकू विमान
F-15F, राफेल और रूस के Su-27 जैसे कई दूसरे लडा़कू विमानों से अधिक ताकतवर
है.
![]() |
यूरोफाइटर टाइफून(Eurofighter Typhoon): |
-------------------------------------
ऊपर दिए गए लड़ाकू विमानों की तुलना अगर भारत द्वारा
खरीदे जाने वाले राफेल से की जाये तो तथ्य बताते हैं कि राफेल इन विमानों से किसी
भी मामले में कम नहीं पड़ता है. इसलिए सरकार को चाहिए कि सभी बाधाओं और विवादों का
जल्दी से निपटारा करके इसे भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाये ताकि दक्षिण
एशिया में शक्ति संतुलन कायम हो सके.
---------------
ये भी पढ़ें-







0 Comments